कबीर के 11 प्रसिद्ध दोहे अर्थ सहित | Kabir Ke Dohe with Meaning

कबीर दास जी हिंदी साहित्य और भक्ति परंपरा के महान संतों में से एक माने जाते हैं। उनके दोहे बहुत सरल भाषा में जीवन की बड़ी-बड़ी बातें समझाते हैं। कबीर जी ने अपने दोहों के माध्यम से सच्चाई, प्रेम, अहंकार, मेहनत, अच्छे कर्म और सही सोच का महत्व बताया है।

कबीर के दोहे आज भी उतने ही उपयोगी हैं, जितने उनके समय में थे। इन दोहों को पढ़कर हमें अपने जीवन को बेहतर बनाने की सीख मिलती है।

नीचे कबीर दास जी के 11 प्रसिद्ध दोहे उनके सरल हिंदी अर्थ के साथ दिए गए हैं।

1. बुरा जो देखन मैं चला

दोहा:

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥

सरल अर्थ:
कबीर जी कहते हैं कि जब मैं दूसरों में बुराई देखने निकला, तो मुझे कोई बुरा नहीं मिला। लेकिन जब मैंने अपने मन के अंदर देखा, तो समझ आया कि मेरे अंदर ही बहुत सारी कमियां हैं।

सीख:
हमें हमेशा दूसरों की गलतियां देखने के बजाय पहले अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए।

2. ऐसी वाणी बोलिए

दोहा:

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय॥

सरल अर्थ:
हमें हमेशा ऐसी मीठी और शांत भाषा बोलनी चाहिए जिससे सामने वाले को अच्छा लगे। हमारे शब्द दूसरों को भी खुशी दें और हमारे मन को भी शांति मिले।

सीख:
मीठे शब्द रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। इसलिए बोलने से पहले अपने शब्दों के बारे में सोचना चाहिए।

3. धीरे-धीरे रे मना

दोहा:

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥

सरल अर्थ:
हर काम अपने सही समय पर होता है। जैसे माली पौधे को बहुत पानी देता है, लेकिन फल तभी आता है जब उसका सही मौसम आता है।

सीख:
हमें जीवन में धैर्य रखना चाहिए। मेहनत करते रहना चाहिए और परिणाम के लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

4. काल करे सो आज कर

दोहा:

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥

सरल अर्थ:
जो काम कल करना है, उसे आज ही कर लेना चाहिए और जो काम आज करना है, उसे अभी कर लेना चाहिए। जीवन में समय कब खत्म हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है।

सीख:
काम को बार-बार टालना सही नहीं है। समय का सही उपयोग करना चाहिए।

5. बड़ा हुआ तो क्या हुआ

दोहा:

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥

सरल अर्थ:
केवल बड़ा या ऊंचा होना ही महत्वपूर्ण नहीं है। खजूर का पेड़ बहुत ऊंचा होता है, लेकिन वह राह चलते व्यक्ति को छाया नहीं देता और उसके फल भी बहुत दूर होते हैं।

सीख:
इंसान की महानता उसके पद, धन या ऊंचाई से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वह दूसरों के कितने काम आता है।

6. माला फेरत जुग भया

दोहा:

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर।
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर॥

सरल अर्थ:
हाथ में माला फेरते-फेरते बहुत समय बीत गया, लेकिन मन की सोच नहीं बदली। कबीर जी कहते हैं कि केवल हाथ से माला फेरने से कुछ नहीं होगा, हमें अपने मन को बदलना होगा।

सीख:
सच्ची भक्ति केवल बाहरी दिखावे में नहीं है। मन को साफ और अच्छा बनाना भी जरूरी है।

7. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ

दोहा:

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

सरल अर्थ:
बहुत सारी किताबें पढ़ लेने से ही कोई सच्चा ज्ञानी नहीं बन जाता। जो प्रेम का सही अर्थ समझ लेता है और अपने जीवन में प्रेम को अपनाता है, वही सच्चा ज्ञानी है।

सीख:
ज्ञान का असली महत्व तभी है जब वह हमारे व्यवहार और जीवन में दिखाई दे।

8. दुख में सुमिरन सब करे

दोहा:

दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय॥

सरल अर्थ:
जब इंसान दुख में होता है, तब वह भगवान को याद करता है। लेकिन सुख के समय भगवान को भूल जाता है। कबीर जी कहते हैं कि अगर हम सुख के समय भी भगवान को याद करें, तो जीवन में दुखों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

सीख:
भगवान को केवल परेशानी के समय नहीं, बल्कि हर समय याद करना चाहिए।

9. निंदक नियरे राखिए

दोहा:

निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥

सरल अर्थ:
जो व्यक्ति हमारी कमियां बताता है, उसे अपने पास रखना चाहिए। क्योंकि वह बिना साबुन और पानी के ही हमारी गलतियां दिखाकर हमारे स्वभाव को बेहतर बनाने में मदद करता है।

सीख:
हर आलोचना बुरी नहीं होती। जो व्यक्ति हमारी सही कमियां बताता है, उसकी बात से हमें सीख लेनी चाहिए।

10. ऐसी करनी कर चलो

दोहा:

ऐसी करनी कर चलो, जग हँसे हम रोय।
ऐसी करनी न कर चलो, हम हँसे जग रोय॥

सरल अर्थ:
हमें जीवन में ऐसे अच्छे कर्म करने चाहिए कि जब हम इस संसार से जाएं तो लोग हमें याद करके दुखी हों। हमें ऐसे कर्म नहीं करने चाहिए कि हमारे जाने पर दुनिया हमसे खुश हो जाए।

सीख:
इंसान की पहचान उसके अच्छे कर्मों से होती है। इसलिए जीवन में हमेशा अच्छे काम करने चाहिए।

11. जाति न पूछो साधु की

दोहा:

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान॥

सरल अर्थ:
किसी साधु या व्यक्ति की जाति देखकर उसका मूल्य नहीं समझना चाहिए। उसके ज्ञान और गुणों को देखना चाहिए। जैसे तलवार की कीमत उसकी धार से होती है, उसकी म्यान से नहीं।

सीख:
किसी व्यक्ति को उसके जन्म या बाहरी पहचान से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, गुण और अच्छे व्यवहार से पहचानना चाहिए।

कबीर के दोहों से हमें क्या सीख मिलती है?

कबीर दास जी के दोहे बहुत छोटे हैं, लेकिन उनमें जीवन की गहरी बातें छिपी हुई हैं। उनके दोहे हमें बताते हैं कि हमें अपने अंदर की कमियों को पहचानना चाहिए, मीठा बोलना चाहिए, समय की कदर करनी चाहिए और दूसरों के प्रति प्रेम और सम्मान रखना चाहिए।

कबीर जी ने दिखावे से दूर रहकर सच्चे मन से भक्ति करने की बात कही। उन्होंने यह भी समझाया कि इंसान की असली पहचान उसके कर्म और व्यवहार से होती है।

आज के समय में भी कबीर के दोहे बच्चों, युवाओं और बड़ों सभी के लिए उपयोगी हैं। अगर हम इन दोहों की सीख को अपने जीवन में अपनाएं, तो हमारा व्यवहार और सोच दोनों बेहतर हो सकते हैं।

निष्कर्ष

कबीर दास जी के दोहे केवल पढ़ने के लिए नहीं हैं, बल्कि जीवन में अपनाने के लिए हैं। उनके सरल शब्द हमें प्रेम, धैर्य, अच्छे कर्म, सच्चाई और आत्म-सुधार का रास्ता दिखाते हैं।

कबीर के दोहे हमें यही सिखाते हैं कि बदलाव की शुरुआत हमेशा अपने आप से करनी चाहिए।

 

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